सफलता के सात चरण -Rakesh

“सफलता के सात चरण “

           

सफलता कभी अचानक से नहीं मिलती दोस्तों और न ही इसका कोई शोर्टकट होता है। सभी सफल होना चाहते हैं लेकिन अधिकतर को सफलता तुरंत चाहिए और वो बिना किसी किसी कड़ी मेहनत के। जैसा आजकल प्रचारित विज्ञापनों से सपष्ट होता है – ‘‘वजन घटायें केवल सात दिनों में वो भी बिना किसी मेहनत के’’ या ‘‘रातों रात करोड़पति बनें’’ या ‘‘धन वर्षा यंत्र लें और करें घर में धन वर्षा’’। एक समझदार व्यक्ति ये अच्छे से जानता है कि ये विज्ञापन और ये दावे कितने सच साबित होते हैं।

            सफलता के कोई शोर्टकट तो नहीं होते दोस्तों लेकिन सफलता का रहस्य जरूर है हमेशा से और वो है केवल और केवल मेहनत। जब भी हम किसी को रातों रात सफल होता देखते हैं तो लगता है कि इसके हाथ कोई जादुई चिराग लगा होगा या कोई तो रहस्य है इसके पास, कोई शोर्टकट तो होगा इसके पास। लेकिन वास्तव में यह उसकी पुरानी मेहनत का फल होता है जो कई बार बाद में एक साथ आना शुरु होता है। यह  बिल्कुल वैसे ही होता है जैसे जब कोई एक प्रतियोगी परीक्षा का विद्यार्थी तैयारी करना शुरु करता है तो उस समय बहुत कम परीक्षा पास कर पाता है लेकिन जब उसकी तैयारी पूरी हो जाती है तो वह लगातार कई परीक्षायें पास करता है। तब कुछ को देखने में लगता है कि वह अचानक से सफल होता जा रहा है जरूर कोई राज है लेकिन वो राज वो रहस्य उसकी लगातार मेहनत ही होती है जिसे हम अधिकतर देख नहीं पाते है।

            दोस्तों सफलता के सात चरण मैं आपको बताना चाहता हूँ। हर कार्य चरणों में ही संपन्न होता है। पहली सीढी के बाद ही दूसरी सीढी आती है इसी प्रकार ये चरण भी एक के बाद एक आते हैं। जब तक पिछला चरण पूरा नहीं होता आगे वाले चरण में समस्या आती है। इसलिए दोस्तों इन चरणों को क्रम से ही अपने जीवन में ढालें तभी सफलता आपके कदम चूमेगी।

                                                            सफलता के सात चरण

1.         निश्चत लक्ष्य : बिना किसी लक्ष्य के तैयारी शुरु करना अथाह सागर में भटकने के समान ही होगा। जब भी हम किसी आई ए एस टॉपर का या अद्भुत सफलता प्राप्त करने वाले व्यक्ति का इंटरव्यू पढते हैं तो देखते हैं कि बचपन से ही उनका एक ही लक्ष्य होता है या वे एक ही लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं और उसे प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, और उसे प्राप्त करते भी हैं। हमें अपना एक निश्चत लक्ष्य चुन लेना चाहिए तभी आगे बढना चाहिए। अन्यथा भटकने के सिवा ज्यादा कुछ हासिल नहीं हो पाता। अगर सफलता मिलती भी है तो वो आपकी वास्तविक योग्यता से कम होती है। तो आज ही अपना एक निश्चत लक्ष्य चुन लें।

 ‘‘क्या बनना चाहते है? क्या करना चाहतें है? क्यों करना चाहते हैं? किसके लिए करना चाहते हैं? इसके लिए खुद को कितना योग्य मानते हैं? ’’ इन प्रश्नों के जवाब एक कागज पर लिखें फिर टटोलें की वास्तव में आप क्या चाहते हैं। फिर उसी दिशा में चल पड़ें निश्चत ही जीत आपकी ही होगी।

2.         दृढ निश्चय : लक्ष्य चुन लेने के बाद अपने निश्चय दृढ बनायें। ठान लें कि अब चाहे कुछ भी हो जाय, कितने भी बलिदान देने पड़ें मैं अपने उद्देश्य से भटकूंगा नहीं। ऐसा न हो कि रात को सोते समय निश्चय करो कि सुबह चार बजे उठना है फिर खूब पढना है। सुबह चार बजते भी हैं लेकिन ये सोचकर अलार्म बंद करके फिर से सो जाते हों कि कल से उठेंगे या सोमवार से शुरु करेंगे या एक तारीख से शुरु करेंगे। दृढ निश्चय कर लें दोस्तों किसी शुभ मुहुर्त का इंतजार न करें। वो कभी नहीं आयेगा। जो है वो आज और अभी है। उठना है तो फिर उठना है, पढना है तो फिर पढना है, जो करना है वो करना ही है, अब कुछ भी हो। ऐसा निश्चय ही दृढ विश्वास और आत्मविश्वास को जन्म देता है। फिर देखना दोस्तों हमें किसी अलार्म की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। सारी प्रकृति आपकी मदद करने को बाहें फैला लेंगी। कोई रुकावट भी नहीं रहेगी। हमारा मन ही बहाने ढूंढता है और ढूंढता है सोचता है तो उसे मिलते भी हैं मत सुनें इन बहानों की आवाज। बस एक ही आवाज हो दिल और दिमाग में कि ‘‘मुझे ऐसा करना ही है’’।

3.         आत्मविश्वास : आत्मविश्वास सब रोगों की दवा है दोस्तों। इसके बिना जीवन में कुछ भी हासिल करना संभव नहीं हो पाता। लेकिन जब आप अपना पहला चरण और दूसरा चरण पूरा कर लेते हैं अर्थात अपना लक्ष्य चुन लेते हैं और खुद को इस योग्य मानते हैं। तब आपमें आत्मविश्वास भी आने लगता है। इसे कभी कम न होने दें। बहुत से आपके साथी, हो सकता है इसे जाने अनजाने तोड़ने का प्रयत्न करें। आप ऐसे लोगों से दूर ही रहें तो बेहतर होगा जो आपके आत्मविश्वास के लिए घातक है। कहना नहीं हैं हमें करके दिखाना है इसलिए हो सके तो अपने लक्ष्यों का ढिंढोरा न पीटे। ऐसे दोस्तों को चुनें जो आपके वास्तविक सहयोगी है आपके आत्मविश्वास को बढाते हैं। आत्मविश्वास कायम रखना है तो अपने चेहरे की मुस्कान को कभी कम न होने दें।

4.         कड़ी मेहनत : मेहनत से कभी जी न चुरायें दोस्तों। इतिहास गवाह है कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती है। लेकिन साथ ही एक बात और कहना चाहूंगा कि मेहनत की दिशा भी तय हो बुद्धि के साथ की जाय तो सफल होने की गति बढ जाती है। अन्यथा ‘‘मेहनत तो गधा भी बहुत करता है,लेकिन जीवन भर भार ही ढोता है।’’ मेहनत करें लेकिन पहलें चुन लें कि क्या करना है क्या नहीं करना है। अंधा धुंध पढने से भी नहीं होता है अच्छी सलाह लें जाने कि परीक्षा पद्धति के अनुसार क्या उपयोगी है। उसी पर खूब मेहनत करें।

5.         नियममितता : मेहनत हो और वो भी नियमित रूप से। बीच में अंतराल बहुत घातक होता है। एक बार तैयारी शुरु की तो जहां तक संभव हो अंतराल न आने दें। अन्यथा पिछली मेहनत का असर भी कम होता है और आत्मविश्वास भी डगमगाने लगता है। दुबारा शुरु करना भी मुश्किल हो जाता है। किसी कारण से या किसी समस्या से समय कम मिल पाये तो कोई बड़ी बात नहीं। रोजाना आठ घंटे पढते हैं और कभी समयाभाव या अन्य आकस्मिक कारण से दो या तीन घंटे ही पढ पा रहे हैं तो घबरायें नहीं और न ही नियमितता तोड़ें। समस्या दूर होते ही गाड़ी अपने आप ट्रेक पर आ जायेगी। लेकिन अगर बीच में छोड़ दिया तो बहुत मुश्किल हो जाती है।

6.         धैर्य : किसी को सफलता जल्दी मिल जाती है और किसी को थोड़ा समय लग जाता है। सबकी गति एक जैसी नहीं होती है दोस्तों। कई बार जीवन में लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन अपना धैर्य नहीं खोयें। बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो उस समय हिम्मत तोड़ देते हैं जब वो सफलता से महज एक कदम दूर होते हैं। धैर्य बनाये रखें और लगे रहें।

7.         खुशी से करें : जो भी करें दोस्तों उसे बोझ न समझ कर खुशी से करें। सफलता से खुशी मिले न मिले लेकिन खुश रहने वाले को सफलता जरूर मिलती है। हमेशा खुश रहने की कोशिश करें। एन्जॉय करते हुए हर कार्य को करें।

‘‘मिल जायेगी हर खुशी, तू तलाश तो कर,

मिट जायेगा हर अंधेरा, तू प्रयास तो कर,

है तेरे अंदर भी वो चिंगारी, तू एतबार तो कर,

दुनिया तेरी भी होगी, तू थोड़ा इंतजार तो कर।’’

(राकेश कड़वासरा)

            दोस्तों प्रयास कभी मत छोड़ना और न कभी हार मानना। जीत निश्चय ही तुम्हारी होगी। शुभकामनाओं सहित……………..

                                                                        आपका दोस्त

                                                                        राकेश कड़वासरा

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